MP NEWS : शराब फैक्ट्री से रेस्क्यू किए गए 59 में से 42 श्रमिक निकले नाबालिग

रेस्क्यू किए गए बालिग श्रमिकों को उनके घर भेजा। नाबालिग पाए गए श्रमिकों में 09 बालिकाएं। विधिवत प्रक्रिया के तहत किया जाएगा बच्चों को पुनर्वासित

 

जिले के सेहतगंज में स्थित शराब फैक्ट्री में शनिवार को राष्ट्रीय बाल आयोग द्वारा रेस्क्यू किए गए 59 बालश्रमिकों में से 42 नाबालिग मिले हैं। दो दिन तक चली पड़ताल व दस्तावेजों की जांच के बाद बच्चों की जानकारी सामने आई है। पहले दिन प्रशासन के सुस्त रहने से बच्चे गायब हो गए थे। सीएम डा. मोहन यादव द्वारा मामले में संज्ञान लेने के बाद दूसरे दिन प्रशासन ने पूरी चुस्ती दिखाते हुए बच्चों की खोजबीन शुरू की।

 

पुनर्वास की तैयारी

दूसरे दिन रविवार को देर रात तक चली पड़ताल के बाद रेस्क्यू किए गए बालश्रमिकों में से 42 नाबालिग पाए गए। बालिग श्रमिकों को घर भेज दिया गया है, लेकिन नाबालिग अभी बाल कल्याण समिति के संरक्षण में हैं। इन्हें विधिवत प्रक्रिया के तहत पुनर्वासित किया जा रहा है। सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। समिति बच्चों के बेहतर हित को देखते हुए उनके पुनर्वास का निर्णय लेगी।

 

उल्लेखनीय है कि रेस्क्यू के बाद इस मामले को जिला प्रशासन ने काफी हल्के में लिया और बच्चों के वेरीफिकेशन में कोई रुचि नहीं दिखाई। कई घंटों तक कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद रात होते ही बच्चे गायब हो गए। जिस पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कड़ी आपत्ति जताई और प्रशासन पर फैक्ट्री संचालक के साथ मिलकर बच्चों को अगवा कराने का आरोप लगाया था। एनसीपीसीआर अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने अधिकारियों की इस लापरवाही के मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की चेतावनी दी है।

 

देर रात तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले में संज्ञान लेते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही थी। इसके बाद आनन-फानन में रात में ही प्रभारी आबकारी अधिकारी सहित तीन आबकारी उपनिरीक्षक को निलंबित कर दिया गया और दूसरे दिन श्रम निरीक्षक के निलंबन आदेश जारी हो गए।

बाल आयोग द्वारा शराब फैक्ट्री में 59 बच्चे रेस्क्यू किए गए थे, जिसमें 20 बालिकाएं व 39 बालक थे। दो दिन चली पड़ताल में 9 बालिकाएं व 32 बालक नाबालिग की श्रेणी में आए हैं। बालिगों को जांच के तुरंत बाद ही घर भेज दिया गया। फिलहाल बच्चे सीडब्ल्यूसी के संरक्षण में हैं। उनके विधिवत पुनर्वास की प्रक्रिया जारी है।

 

– शक्तिसिंह बघेल, सदस्य, सीडब्ल्यूसी, रायसेन

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